अध्याय 50 टकराव

एला को पता ही नहीं चला और वह सोफे पर ही ऊँघते-ऊँघते सो गई। उसका शरीर हल्का-सा एक तरफ़ झुक गया था।

ब्रायर रसोई से बाहर आई। हालत देखते ही उसने एला के कंधों पर एक जैकेट डाल दी और उसे हल्का-सा थपथपा कर धीरे से बोली, “उठो।”

एला की आँखें झट से खुल गईं। खाने की खुशबू सूँघकर उसने पूछा, “खाना बन गया?”

“हा...

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